नरवाना में बाल विवाह पर समय रहते ब्रेक, 15 वर्षीय किशोरी की शादी रुकवाई गई

– प्रशासन, सीएमपीओ और सामाजिक संगठन की तत्परता से 10 किमी पहले लौटी बारात, बाल संरक्षण तंत्र की सजगता आई सामने

नरवाना/जींद (हरियाणा): हरियाणा के जींद जिले के नरवाना में एक 15 वर्षीय किशोरी की शादी को ऐन वक्त पर रोक दिया गया। प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) और सामाजिक संगठन “मिशन टू द डेस्परेट एंड डेस्टिट्यूट (एमडीडी) ऑफ इंडिया” की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गैरकानूनी विवाह को होने से पहले ही रुकवा दिया। स्थिति यह थी कि बारात महज 10 किलोमीटर दूर थी, लेकिन सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और बारात को बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा।
मामले की शुरुआत एक गोपनीय फोन कॉल से हुई, जिसमें एक युवक ने सोशल मीडिया पर देखे गए जागरूकता वीडियो के जरिए एमडीडी के जिला समन्वयक नरेंद्र शर्मा से संपर्क कर इस बाल विवाह की सूचना दी। इसके साथ ही लड़की के ताऊ द्वारा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को भेजी गई शिकायत ने भी कार्रवाई को मजबूती दी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लड़की के पिता ने 1.5 लाख रुपये लेकर बेटी की शादी तय कर दी है। सूचना के आधार पर एनसीपीसीआर के निर्देश पर जींद पुलिस, सीएमपीओ और एमडीडी की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। जांच में सामने आया कि लड़की महज साढ़े 15 साल की है और चार बहनों में सबसे बड़ी है। वह छठी कक्षा तक पढ़ी थी, लेकिन हाल ही में स्कूल जाना बंद कर चुकी थी। घर पर शादी की तैयारियां पूरी थीं और करीब 20 मेहमान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, जिसके बाद माता-पिता ने थाने में हलफनामा देकर आश्वासन दिया कि बेटी की शादी बालिग होने के बाद ही करेंगे। वहीं, चूंकि लड़का भी नाबालिग है, उसे भी अपने परिवार के साथ अधिकारियों के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है।
इस दौरान किशोरी ने बाल कल्याण समिति के सामने पेश होकर अपने माता-पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया और जबरन शादी कराने का आरोप लगाया। फिलहाल उसे बाल आश्रय गृह में रखा गया है, जहां उसकी काउंसलिंग की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर एमडीडी ऑफ इंडिया के सीईओ सुरिंदर सिंह मान ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि एक छोटी सी सूचना भी बच्चों के भविष्य को बचा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म किया जा सकता है और 2030 से पहले हरियाणा को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।