लोकेटर राज में प्रशासन बेबस, बांदा–फतेहपुर में अवैध खनन का खुला खेल



– मर्का घाट बना अवैध खनन का स्थायी अड्डा, बिना समय सीमा और परमिट पारदर्शिता के चल रहा कारोबार

– कानून से पहले माफिया एक्टिव, कार्रवाई से पहले गायब हो जाते हैं वाहन

– ग्रामीण सड़कें और पुल हो रहे क्षतिग्रस्त, जिम्मेदार विभाग बने मूकदर्शक

फतेहपुर/बांदा। बांदा जिले से लेकर फतेहपुर जनपद तक अवैध खनन और ओवरलोडिंग अब छिपा हुआ अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क के रूप में खुलेआम संचालित हो रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों से पहले ही लोकेटरों को हर सूचना मिल जाती है और कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अवैध वाहन रास्ता बदलकर गायब हो जाते हैं।
बांदा जिले के मर्का घाट (गाटा संख्या 96/4) को अवैध खनन का स्थायी अड्डा बना दिया गया है। यहां न तो समय सीमा का पालन किया जा रहा है, न ही परमिट व्यवस्था में कोई पारदर्शिता दिखाई दे रही है। खनन इस स्तर तक संगठित हो चुका है कि यह केवल स्थानीय दबंगों या ट्रैक्टर चालकों का काम नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की सुनियोजित गतिविधि बन चुका है। अवैध खनन और परिवहन के लिए लोकेटरों की एक पूरी टीम तैनात है, जो बाइक और मोबाइल नेटवर्क के जरिए पुलिस चेकिंग, एसडीएम और खनन विभाग की मूवमेंट तथा संभावित छापेमारी की जानकारी सीधे माफियाओं तक पहुंचा देती है। इसका नतीजा यह होता है कि कार्रवाई से पहले ही ओवरलोड वाहन रूट बदल लेते हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि जानकारी कहीं न कहीं अंदर से लीक हो रही है। कृषि कार्यों के लिए जारी सीमित परमिट अब अवैध खनन का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। एक परमिट पर दर्जनों चक्कर लगाकर सैकड़ों ट्रॉली मोरम का परिवहन किया जा रहा है, जबकि राजस्व विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। ग्रामीण सड़कों की हालत खराब हो चुकी है, पुलों पर क्षमता से अधिक भार डाला जा रहा है, लेकिन न तो परिवहन विभाग सक्रिय दिखता है और न ही खनन विभाग। रामनगर कौहन स्थित यमुना पुल अवैध परिवहन का सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है। देर रात बांदा से निकलने वाले ओवरलोड वाहन लोकेटरों की निगरानी में इसी पुल से फतेहपुर में प्रवेश करते हैं। यह तभी संभव है जब या तो निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो या फिर किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त हो। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की गई है और एसटीएफ, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के स्तर से सख्त निर्देश भी जारी होते रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि नेटवर्क जस का तस चल रहा है। रामनगर कौहन, सिंघुतारा, नगर पंचायत असोथर और प्रताप नगर झाल क्षेत्र में दिन-रात अवैध परिवहन जारी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब मौके से वीडियो और तस्वीरों जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यदि जिम्मेदार अधिकारी इन साक्ष्यों के बावजूद चुप हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत की आशंका को भी मजबूत करता है।
जब घाट, वाहन, रूट और सब कुछ सामने है, तो कार्रवाई किसके इशारे पर रुकी हुई है—यह अब जनता का सीधा सवाल बन चुका है। जब तक लोकेटर नेटवर्क, परमिट के दुरुपयोग और अंदरूनी सूचना लीक पर एक साथ कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक बांदा–फतेहपुर में अवैध खनन यूं ही कानून को खुली चुनौती देता रहेगा।