UP पंचायत चुनाव 2026 पर हाईकोर्ट सख्त! समय पर चुनाव होंगे या नहीं? निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब, सरकार का दावा – तय समय पर ही होंगे पंचायत चुनाव

– पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता: हाईकोर्ट

– पहली बैठक 27 मई 2021, 26 मई 2026 को खत्म होगा कार्यकाल

– पंचायत चुनाव 2026 पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा – समय पर होंगे चुनाव या नहीं?

– आयोग को 25 मार्च तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश

– कोर्ट ने महाधिवक्ता/अपर महाधिवक्ता को किया तलब

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 को लेकर संवैधानिक समयसीमा और प्रशासनिक तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी या नहीं।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि पंचायत चुनाव समय पर कराना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि संवैधानिक बाध्यता है। अदालत ने अनुच्छेद 243-E का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक से अधिकतम पांच वर्ष ही हो सकता है और इसे किसी भी स्थिति में बढ़ाया नहीं जा सकता। दरअसल, उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को आयोजित हुई थी। इस आधार पर इन पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यदि इस तिथि तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह मुद्दा उठाया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीखों में बार-बार बदलाव किया गया है। पहले यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 तक पूरी की जानी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि इस देरी के चलते आरक्षण निर्धारण, नामांकन, मतदान और मतगणना जैसे चरणों के लिए पर्याप्त समय नहीं बच पाएगा, जिससे चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से यह भरोसा दिलाया गया है कि पंचायत चुनाव तय समयसीमा के भीतर ही संपन्न कराए जाएंगे। सरकार का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। कई जिलों में मतपत्रों की छपाई शुरू हो चुकी है और उन्हें संबंधित स्थानों तक पहुंचाया भी जा रहा है। इसके अलावा मतदान केंद्रों का निर्धारण, कर्मचारियों की तैनाती और बैलेट बॉक्स की व्यवस्था जैसे कार्य भी तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह विस्तृत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि 15 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद क्या 26 मई 2026 तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया—जिसमें नामांकन, मतदान और मतगणना शामिल है—समय पर पूरी कराई जा सकती है या नहीं। अदालत ने इस संबंध में 25 मार्च 2026 तक विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य के महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश भी दिए हैं।
इस पूरे मामले पर अब प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो यह न केवल संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है, बल्कि पंचायतों के संचालन पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में सभी की नजर अब अगली सुनवाई और राज्य निर्वाचन आयोग के जवाब पर टिकी हुई है।