घूसखोर लेखपाल पर गंभीर आरोप, पीड़िता ने डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग



फतेहपुर। बिंदकी तहसील अंतर्गत ग्राम साई मौहार की निवासी पीड़िता कुंती देवी पत्नी रघुवीर ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ग्राम सभा साई के तत्कालीन लेखपाल कुलदीप कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि उक्त लेखपाल द्वारा आए दिन घूस की मांग कर उसे व उसके परिवार को प्रताड़ित किया गया और घूस न देने पर बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के उसकी बाउंड्री वॉल को जेसीबी लगाकर गिरा दिया गया।
पीड़िता ने बताया कि उसके पति रघुवीर से लेखपाल कुलदीप द्वारा बाउंड्री न गिराने के एवज में 25 हजार रुपये की घूस मांगी गई थी, जिसका ऑडियो साक्ष्य भी उपलब्ध है। घूस न देने पर लेखपाल ने बिना किसी उच्च अधिकारी को सूचित किए मनमाने ढंग से जेसीबी मंगवाकर बाउंड्री वॉल गिरवा दी और यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मकान रास्ते पर बना हुआ है। जबकि जिस रास्ते का हवाला दिया गया है, वह लगभग 70 वर्षों से अस्तित्व में है और वर्तमान में भी वैध रूप से संचालित है।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि लेखपाल गांव में आय, जाति, निवास, ईडब्ल्यूएस जैसे जरूरी प्रमाण पत्रों में रिपोर्ट लगाने के लिए भी अवैध वसूली करता है और बिना पैसे लिए कोई कार्य नहीं करता। गांव के लोगों में भी लेखपाल के इस रवैये को लेकर आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। पीड़िता ने बताया कि बाउंड्री गिराए जाने के बाद उसने दिनांक 04 अक्टूबर 2025 को समाधान दिवस में ऑडियो साक्ष्य एवं प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, जिसके आधार पर लेखपाल कुलदीप कुमार को निलंबित किया गया था। निलंबन के बाद भी लेखपाल द्वारा पीड़िता के पति को लगातार धमकियां दी जाती रहीं कि वह दोबारा उसी गांव का चार्ज लेकर देख लेगा और झूठे मुकदमों में फंसा देगा। पीड़िता का आरोप है कि लेखपाल द्वारा जांच टीम को प्रभावित कर सांठगांठ के माध्यम से बिना निष्पक्ष जांच कराए बहाली आदेश प्राप्त कर लिया गया। जांच अधिकारी द्वारा न तो शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया और न ही उसका पक्ष सुना गया, बल्कि केवल लेखपाल का पक्ष सुनकर उसे दोषमुक्त घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, लेखपाल को पुनः ग्राम सभा साई का ही प्रभार सौंप दिया गया है। कुंती देवी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि न्यायहित में घूसखोर लेखपाल कुलदीप कुमार को निष्पक्ष जांच पूरी होने तक निलंबित रखा जाए, जांच अधिकारी को शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने के निर्देश दिए जाएं तथा जांच पूर्ण होने तक लेखपाल को ग्राम सभा साई का प्रभार न दिया जाए। पीड़िता ने आशंका जताई है कि लेखपाल को पुनः उसी गांव का चार्ज मिलने से उसके द्वारा बदले की भावना से शोषण किए जाने की पूरी संभावना है। पीड़िता की शिकायत के बाद मामला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।