– प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, डिस्चार्ज के कुछ मिनटों में हुई मौत
फतेहपुर। हुसैनगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गौरा कलां में एक नवयुवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर के इलाज और लापरवाही के चलते युवक की जान चली गई।
मृतक की पहचान अमन रैदास पुत्र बिंदा प्रसाद (उम्र लगभग 26 वर्ष) निवासी गौरा कलां के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार अमन को हाइड्रोसिल की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर एवं वर्तमान ग्राम प्रधान के संपर्क में गया था। आरोप है कि उक्त झोलाछाप डॉक्टर ने अपने कमीशन के लालच में अमन को मवई चौराहा के पास संचालित एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 02 फरवरी 2026 को हाइड्रोसिल का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद अमन की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हालत गंभीर होने पर उसे 06 फरवरी को दोबारा उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद समुचित इलाज न मिलने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि 07 फरवरी की सुबह अमन को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन अस्पताल से निकलते ही उसकी तबीयत और बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में गांव के झोलाछाप डॉक्टर एवं वर्तमान ग्राम प्रधान की मिलीभगत सामने आ रही है। झोलाछाप डॉक्टर द्वारा मरीज को कमीशन के आधार पर निजी अस्पताल भेजने की बात कही जा रही है, जिससे पूरे इलाज की प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि खबर लिखे जाने तक न तो मृतक का पंचनामा हुआ है और न ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई है, जिससे मामले पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगा रहे हैं कि विभाग की “धृतराष्ट्र नीति” (आंख मूंदकर बैठने की नीति) के कारण जिले में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे अवैध रूप से इलाज करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो शायद एक और युवक की जान नहीं जाती। फिलहाल परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और झोलाछाप डॉक्टर व संबंधित अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
