औद्यानिक खेती का नया मॉडल, हाईटेक नर्सरी से किसानों की आय में बढ़ोतरी



– जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में उद्यान विभाग रच रहा सफलता की नई कहानी

– हर साल 20–25 लाख रोगमुक्त सब्जी पौध तैयार कर किसानों को मिल रहा लाभ

– अगेती फसल से किसानों को मिल रहा बेहतर बाजार भाव

फतेहपुर। जनपद में उद्यान विभाग की पहल से औद्यानिक खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जिलाधिकारी रविन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में जिले में हाईटेक नर्सरियों की स्थापना कर किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
विकास खंड हसवा के ग्राम पंचायत रमवा पंथुआ स्थित राजकीय औद्यानिक प्रक्षेत्र में स्थापित मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (हाईटेक नर्सरी) सफलता की नई इबारत लिख रही है। यहां से प्रतिवर्ष लगभग 20 से 25 लाख उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त शाकभाजी पौध जैसे मिर्च, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, गोभी एवं कद्दू वर्गीय फसलों के पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले जहां किसान पारंपरिक तरीकों से स्वयं पौध तैयार करते थे, जिससे लागत अधिक और उत्पादन कम होता था, वहीं अब हाईटेक नर्सरी से तैयार संकर पौधों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता मिल रही है। इससे किसानों को अगेती फसल प्राप्त हो रही है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। जनपद में वर्तमान में तीन हाईटेक नर्सरियां संचालित हैं, जिनमें रमवा पंथुआ (हसवा), कम्पनीबाग फतेहपुर और कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव शामिल हैं। इन केंद्रों पर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पौध तैयार कर किसानों की मांग के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) एवं प्रगतिशील कृषकों को औद्यानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जनपद के कई किसानों ने हाईटेक नर्सरी से पौध लेकर अपने खेतों में रोपण किया और बेहतर परिणाम प्राप्त किए। किसानों के अनुसार, समय से पौध उपलब्ध होने के कारण उन्हें 25-30 दिन पहले फसल मिल गई, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ और अतिरिक्त लाभ भी हुआ।
कुल मिलाकर, उद्यान विभाग की यह पहल फतेहपुर के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है और जिले को औद्यानिक खेती के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।