17 साल बाद नफीस हत्याकांड में 12 दोषियों को उम्रकैद, 20-20 हजार का जुर्माना



– अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूजा विश्वकर्मा की अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

– 2009 में हुई वारदात, 17 वर्ष बाद मिला न्याय

फतेहपुर। वर्ष 2009 में हथगांव थाना क्षेत्र के पट्टीशाह गांव में दिनदहाड़े हुई नफीस की हत्या के बहुचर्चित मामले में 17 वर्ष बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-2) पूजा विश्वकर्मा की अदालत ने 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2009 में नफीस अपने भाई शरीफ सेठ के साथ मोटरसाइकिल से पट्टीशाह जा रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आरोपितों ने बंदूक और तमंचों से फायरिंग कर दोनों पर हमला कर दिया। घटना में नफीस की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल शरीफ सेठ को कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पांच अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी है। शासकीय अधिवक्ता प्रमुख श्रीवास्तव एवं एम. तारिक फरीदी ने न्यायालय में साक्ष्य एवं सबूत प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष के अनुसार कई आरोपितों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और क्षेत्र में उनका प्रभाव भी था। न्यायालय ने दोष सिद्ध पाए जाने पर सलमान, सिकंदर, सीमाब, शहीद राजा, मोबिन, गुरु मसरूर, फरहान उर्फ बासु, मैली असगर, रुकनुद्दीन, रमेश चंद्र, मोहम्मद हई सहित कुल 12 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक आरोपित नाबालिग होने के कारण उसका मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। करीब डेढ़ दशक बाद आए इस फैसले से मृतक के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।