श्री राधा कृष्ण मंदिर में भागवत कथा का हुआ आयोजन



– आचार्य ने सुनाया गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग

फतेहपुर। शहर के खेलदार मोहल्ले स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान, आचार्य विद्यासागर शुक्ल ने गोकर्ण और उनके दुश्चरित्र भाई धुंधकारी के प्रसंग का वर्णन किया।
आचार्य शुक्ल ने कथा सुनाते हुए बताया कि धर्मी ब्राह्मण आत्मदेव के दो पुत्र थे। इनमें गोकर्ण विद्वान और गुणी थे, जबकि धुंधकारी दुष्ट, चोर और वेश्यागामी था। धुंधकारी के कुकर्मों से दुखी होकर आत्मदेव वन चले गए थे। धुंधकारी की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगी। अपने भाई की आत्मा को मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से गोकर्ण ने श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के प्रभाव से धुंधकारी, जो प्रेत योनि में था, प्रत्येक दिन कथा सुनकर अपनी एक गांठ तोड़ता गया। सात दिनों की कथा पूरी होने पर उसकी आत्मा शुद्ध हुई और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई। आचार्य जी ने कथा के अंत में मनन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि धुंधकारी को मुक्ति इसलिए मिली क्योंकि उसने कथा को केवल सुना ही नहीं, बल्कि उस पर मनन भी किया। बाद में, गोकर्ण ने फिर से कथा का आयोजन किया, जिससे नगर के सभी जीवों को दिव्य रूप मिला और वे वैकुंठ धाम चले गए।
इस कथा के मुख्य यजमान विवेक शुक्ला, कल्पना शुक्ला, मयंक शुक्ला और शिवांगी शुक्ला थे। इनके अतिरिक्त, गौरव त्रिपाठी, प्रदीप यादव, जीतू गुप्ता, अवनीश गुप्ता, अंकुर गुप्ता, स्वतंत्र, मृदुल, अजय सोनी, विवेक श्रीवास्तव, राधा यादव, नंदिनी, लंगोड़ा, अभिलाष, मंजरी, कमलेश, लिली, पूर्णिमा, राजेश्वरी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।