भादर नंदी गौशाला में सरकारी दावों की पोल, भूख-ठंड से जूझते गोवंश


कागज़ों में चारा-इलाज, ज़मीनी हकीकत में बदहाली

– गौ सेवक ने लगाए गंभीर आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश

– मीडिया में मामला आने पर सीडीओ हुए सख्त, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं बीडीओ पहुंचे गौशाला

फतेहपुर। खागा तहसील क्षेत्र के ऐरायाँ विकास खंड अंतर्गत भादर पंचायत स्थित नंदी गौशाला इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के दावों के बीच यहां की स्थिति इसके ठीक उलट बताई जा रही है। आरोप है कि गौशाला में गोवंशों को न समुचित चारा मिल रहा है, न इलाज और न ही ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था है, जिससे गोवंश लगातार बीमार पड़ रहे हैं और मौतें हो रही हैं।
गौ सेवक गजराज (निवासी टिकरी गांव) ने आरोप लगाया कि चारा आपूर्ति केवल कागज़ों तक सीमित है। रजिस्टरों में लाखों रुपये के चारे की एंट्री है, लेकिन गोवंशों को भरपेट भोजन नहीं मिल रहा। गौशाला में न हरा चारा है, न भूसा और न ही चोकर। लगभग 150 मवेशियों के लिए दो-चार महीने में कभी-कभार कुछ ही बोरी पशु आहार पहुंचने की बात कही जा रही है। गौशाला के खंभे और बाड़ टूटे होने के कारण गोवंश दिनभर बाहर सड़कों और खेतों में घूमते रहते हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है, लेकिन पंचायत और विकास विभाग की ओर से मरम्मत को लेकर कोई पहल नहीं की गई। भीषण ठंड के बीच गौशाला में न काऊ कोट उपलब्ध हैं और न ही अलाव की व्यवस्था। खुले आसमान के नीचे ठिठुरते गोवंशों की स्थिति देखकर ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि यह सीधा सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। वहीं चारा और इलाज के अभाव में गोवंशों की मौत की बात सामने आ रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृत गोवंशों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड क्यों नहीं है। न पोस्टमार्टम की सूचना मिल रही है और न ही उच्चाधिकारियों को रिपोर्टिंग की जा रही है। साथ ही गौशाला का ट्रांसफार्मर कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे पूरी गौशाला अंधेरे में डूबी हुई है। बिजली न होने से रात में देखभाल और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों और गौ सेवकों की मांग

ग्रामीणों और गौ सेवकों ने प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई, तथा तत्काल चारा, इलाज और बिजली व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
यदि समय रहते प्रशासन ने स्थिति नहीं सुधारी, तो यह मामला केवल अव्यवस्था नहीं बल्कि गौवंश संरक्षण के नाम पर गंभीर लापरवाही का उदाहरण बन सकता है।

प्रशासन से सीधे सवाल

– गौशाला की नियमित निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी है?

– चारा, इलाज और बिजली के लिए स्वीकृत बजट कहां खर्च हुआ?

– मौतों के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?



क्या बोले जिम्मेदार –

प्रकरण संज्ञान में आया है जिसकी सत्यता एवं जांच के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं खण्ड विकास अधिकारी – ऐरायां को मौके पर स्थलीय निरीक्षण के लिए भेजा गया है जो भी रिपोर्ट आएगी उसी के अनुसार अग्रिम कार्यवाही तय की जाएगी – पवन कुमार मीना, मुख्य विकास अधिकारी

मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन पर ऐरायां ब्लॉक के भादर गांव स्थित नंदी गौशाला का स्थलीय निरीक्षण करने आए हैं जहां पर निष्पक्ष जांच करके रिपोर्ट सौंपी जाएगी, वैसे मौके पर गौ वंश का इलाज किया जा रहा है जबकि दूसरे मृत गौ वंश का अन्त्येष्टि कराया गया है शेष जांच भी हर पहलू पर की जा रही है – डॉ वेदव्रत गंगवार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

जिला स्तरीय अधिकारियों के निर्देशन पर ग्राम पंचायत भादर में स्थित नंदी गौशाला का स्थलीय निरीक्षण मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के साथ किया जा रहा है, निश्चित रूप से निष्पक्ष जांच होगी और कमी पाए जाने पर जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी तय की जाएगी – अशोक कुमार सिंह, खण्ड विकास अधिकारी – ऐरायां