बाल संरक्षण की पढ़ाई को मिला संस्थागत आधार
गुरु

– जम्भेश्वर विश्वविद्यालय और C-Lab के बीच अहम करार, नए कोर्स होंगे शुरू


हिसार (हरियाणा)। बाल अधिकार और बाल संरक्षण को अकादमिक ढांचे में मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने C-Lab (Center for Legal Action and Behavior Change for Children) के साथ समझौता किया है। इस करार के तहत अब विश्वविद्यालय में बाल संरक्षण और बाल अधिकारों से जुड़े विषयों पर स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
समझौते के अनुसार C-Lab पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक सामग्री, अवधि और पात्रता तय करेगा तथा विश्वविद्यालय को तकनीकी सहयोग भी देगा। वहीं विश्वविद्यालय अपने सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से इन कोर्सों को लागू करेगा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।


कम फीस में ज्यादा छात्रों को अवसर
दोनों संस्थानों ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि इन पाठ्यक्रमों की फीस न्यूनतम रखी जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र जुड़ सकें और देश में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने में योगदान दे सकें।
ज्ञान केंद्र बनने की दिशा में पहल
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ऐसे जागरूक और संवेदनशील युवाओं को तैयार करना है जो नीति-निर्माण, कानून प्रवर्तन, मीडिया और सामाजिक स्तर पर प्रभावी भूमिका निभा सकें।
जमीनी अनुभव और अकादमिक क्षमता का संगम
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. संगीता गौड़ ने इस साझेदारी को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे जमीनी अनुभव और अकादमिक शोध के बीच की दूरी कम होगी।
उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रमों में बाल विवाह, बाल मजदूरी, मानव तस्करी, ऑनलाइन सुरक्षा और बाल अधिकारों के कानूनी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।
NAAC A+ और NIRF में शीर्ष स्थान
372 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय में करीब 52 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने इसे A+ ग्रेड दिया है, जबकि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 में इसे राज्य के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में स्थान मिला।
सपोर्ट पर्सन कोर्स की बढ़ती मांग
इस बीच C-Lab ने बाल यौन शोषण मामलों में ‘सपोर्ट पर्सन’ के लिए विशेष सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के बाद इन पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ी है।