– अकीदतमंदों ने पेश की मौला अली को खिराज-ए-अकीदत
– साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी की देखरेख में हुआ कार्यक्रम
फतेहपुर। थाना सुल्तानपुर घोष क्षेत्र के बहेरा सादात गांव में रमज़ान के पवित्र महीने में इक्कीस रमज़ान के मौके पर हज़रत अली की शहादत की याद में ताबूत का जुलूस बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों अकीदतमंदों ने हिस्सा लेकर गम का इज़हार किया और हज़रत अली को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
कार्यक्रम की शुरुआत मजलिस से हुई, जिसमें उलेमा-ए-किराम ने हज़रत अली की ज़िंदगी, उनके किरदार, इंसाफ, बहादुरी और इस्लाम के लिए दी गई कुर्बानियों पर विस्तार से रोशनी डाली। मजलिस के बाद ताबूत का जुलूस मस्जिद जववादिया से निकाला गया, जो गांव के विभिन्न मार्गों से होता हुआ गुजरा। जुलूस में शामिल अजादारों ने नौहा-ख्वानी और मातम करते हुए हज़रत अली की शहादत को याद किया। उलेमा ने बताया कि हज़रत अली का जन्म मक्का शहर में काबा शरीफ के अंदर हुआ था। वह इस्लाम के पैगंबर हज़रत मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे। बचपन से ही उन्होंने इस्लाम की शिक्षा प्राप्त की और सबसे पहले इस्लाम कबूल करने वालों में उनका नाम लिया जाता है। हज़रत अली अपनी बहादुरी, इंसाफ और इल्म के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इस्लाम के शुरुआती दौर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जंगों में हिस्सा लिया और हमेशा सच और इंसाफ का साथ दिया। उनकी सादगी, न्यायप्रियता और गरीबों के प्रति हमदर्दी के कारण उन्हें मुसलमानों के बीच खास मुकाम हासिल है। उलेमा ने बताया कि हज़रत अली ने लगभग पांच वर्षों तक खिलाफत की जिम्मेदारी संभाली। उनके दौर में न्याय और बराबरी पर आधारित शासन व्यवस्था स्थापित की गई और समाज में अमन व इंसाफ कायम करने की कोशिश की गई। इस्लामिक इतिहास के अनुसार रमज़ान की 19 तारीख को इराक के कूफ़ा शहर में जब हज़रत अली फज्र की नमाज़ के लिए मस्जिद-ए-कूफ़ा पहुंचे, उसी समय अब्दुर्रहमान इब्न मुल्जिम नामक व्यक्ति ने ज़हर में बुझी तलवार से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और दो दिन बाद रमज़ान की 21 तारीख को उन्होंने शहादत पाई। बहेरा सादात में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने हज़रत अली की शहादत को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान शिया और सुन्नी समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिसने क्षेत्र में आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया। मौजूद लोगों ने कहा कि हज़रत अली एक ऐसी महान शख्सियत थे, जिनके बेटों इमाम हसन और इमाम हुसैन ने करबला की जंग में अपने बहत्तर साथियों के साथ बेमिसाल कुर्बानी देकर इस्लाम की हिफाज़त की। उक्त सभी कार्यक्रम साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजेए) के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी की देखरेख में शांति पूर्वक सफलता के साथ संपन्न हुआ।
