शबे क़द्र की रात हजार महीनों से बेहतर – क़ारी बिलाल नूरी



– रोज़ा, नमाज़ और ज़कात की फ़ज़ीलत पर हुई तकरीर

फतेहपुर। पवित्र रमज़ान माह के आखिरी अशरे के अवसर पर खागा तहसील क्षेत्रांतर्गत सुल्तानपुर घोष गांव में पेश इमाम कारी बिलाल नूरी ने रमज़ान की अहमियत और उसकी फ़ज़ीलत पर विस्तार से तकरीर की।
अपने बयान में कारी बिलाल नूरी ने कहा कि रमज़ान का महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है। इस पवित्र माह में रोज़ा, नमाज़, तिलावत-ए-कुरआन, तरावीह, सदका, फ़ितरा और ज़कात के जरिए इंसान अपने गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की रहमत हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि रमज़ान के आखिरी अशरे की खास अहमियत है, क्योंकि इसी दौरान शबे कद्र की मुबारक रात आती है, जो हजार महीनों से बेहतर बताई गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस मुकद्दस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, जरूरतमंदों की मदद करें और समाज में भाईचारा, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम फैलाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि ज़कात और सदका देने से गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद होती है, जिससे समाज में समानता और भाईचारा बढ़ता है। तकरीर के अंत में कारी बिलाल नूरी ने मुल्क में अमन, चैन, खुशहाली और तरक़्क़ी के लिए खास दुआ कराई। इस मौके पर बड़ी संख्या में रोज़ेदार और नमाज़ी मौजूद रहे और सभी ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी और बेहतर जिंदगी की दुआ मांगी। धार्मिक कार्यक्रम के बाद लोगों ने एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दी और इबादत के साथ रमज़ान के आखिरी दिनों को ज्यादा से ज्यादा नेक कामों में बिताने का संकल्प लिया।