– दिल्ली का बजट, फतेहपुर की नब्ज – कहीं मुस्कान, कहीं मायूसी
– महंगाई से परेशान गृहिणियां, एमएसपी पर टकटकी लगाए किसान, टैक्स राहत से खुश नौकरीपेशा
– उम्मीदों का बजट या वादों का दोहराव? फतेहपुर में मिली-जुली प्रतिक्रिया
फतेहपुर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर जिले में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। किसान, नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों ने अपने-अपने नजरिए से बजट को देखा और अपनी राय रखी।
किसानों का कहना है कि बजट में प्राकृतिक खेती, तकनीक और प्रशिक्षण की बात तो की गई है, लेकिन फसल का सही दाम यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई, जिससे वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किसानों की चिंता खाद, बीज और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी बनी हुई है। नौकरीपेशा वर्ग की राय है कि टैक्स नियमों में कुछ सरलता जरूर आई है, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिली है, लेकिन इनकम टैक्स स्लैब में बड़ी कटौती नहीं होने से वे ज्यादा खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल, गैस और बिजली जैसे जरूरी खर्चों में कमी नहीं होने से महंगाई का बोझ अभी भी बना हुआ है। मध्यम वर्ग के लोगों का कहना है कि बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है, जो अच्छी बात है, लेकिन रोजमर्रा के खर्च जैसे रसोई गैस, खाद्य सामग्री और बच्चों की पढ़ाई पर कोई सीधी राहत नहीं मिली है। गृहिणियों का कहना है कि बजट में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट जरूर बताए गए हैं, लेकिन घरेलू खर्च कम होता नहीं दिख रहा। वहीं व्यापारियों की राय है कि छोटे व्यापारियों के लिए नियम और आसान होने चाहिए थे, जिससे व्यापार करने में दिक्कत न हो।कुल मिलाकर जिले के लोगों की राय यही है कि बजट में विकास की दिशा तो दिखाई गई है, लेकिन आम आदमी को तुरंत मिलने वाली राहत कम है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में योजनाओं का लाभ जमीन पर दिखाई देगा।
दिल्ली में शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब बजट का थैला खोला, तो उसकी गूँज हमारे फतेहपुर के चौक-बाजार से लेकर गांवों की चौपालों तक सुनाई दी। बजट को लेकर यहाँ के लोगों की मिली-जुली राय है। कोई इसे भविष्य का बजट बता रहा है, तो कोई इसे पुरानी बातों का दोहराव कह रहा है। बताते चलें कि बजट आते ही जिले के नेताओं में बहस छिड़ गई है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि मोदी सरकार ने इस बजट से विकास की रफ्तार बढ़ा दी है, जिससे फतेहपुर में भी नए उद्योग लगेंगे और युवाओं को काम मिलेगा। वहीं, विपक्ष का कहना है कि इस बजट में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कुछ खास नहीं है, बस बड़े-बड़े वादे हैं। वहीं शहर के हरिहरगंज और आबूनगर इलाके में जब हमने लोगों से बात की, तो सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई ही रहा। इस दौरान गृहिणियों का कहना रहा है कि “हमे तो बस इससे मतलब है कि सिलेंडर और तेल के दाम कम हों। बजट में बड़ी-बड़ी बातें तो हैं, लेकिन रसोई का खर्च कम होता नहीं दिख रहा।” वहीं नौकरीपेशा लोग कहते नजर आए कि टैक्स में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को कुछ हद तक राहत मिली है, जिससे उनके चेहरे पर थोड़ी मुस्कान है। इसी क्रम में किसानों और व्यापारियों की राय रही है कि खेती-किसानी के गढ़ फतेहपुर में किसानों की नजरें खाद और बीज पर मिलने वाली मदद पर थीं। विशेषकर कुछ किसान अपनी राय देते हुए बोलें और जिनमें से कई किसानों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात को सराहा है, लेकिन ज्यादातर किसान इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें उनकी फसल का सही दाम (एमएसपी) मिलेगा या नहीं। वहीं जिले के छोटे व्यापारियों का कहना रहा है कि व्यापार करने के नियम और आसान होने चाहिए थे ताकि दुकानदारी बिना किसी टेंशन के चल सके। वैसे इस बजट में आसान शब्दों में बजट का सार के अनुसार कहा जाए तो युवाओं के लिए ट्रेनिंग और नई नौकरियों के लिए पैसे का इंतजाम किया गया है। इसके साथ ही बजट के अनुसार बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। और शहर के लिए सड़कों और पुलों के निर्माण में तेजी आएगी। अर्थात कुल मिलाकर कहें तो फतेहपुर की जनता इस बजट को ‘उम्मीदों का बजट’ मान रही है, लेकिन असली खुशी तभी होगी जब चीजें सस्ती होंगी और हाथ में पैसा बचेगा।
