महाशिवरात्रि पर थवईश्वर धाम में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़



– प्राचीन सिद्धपीठ में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं होती हैं पूरी

फतेहपुर। बहुआ ब्लॉक स्थित थवई गांव में निचली गंगा नहर के किनारे स्थित प्राचीन सिद्धपीठ थवईश्वर धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दिव्य धाम की पौराणिक महिमा और चमत्कारी मान्यताएं दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं।
महाशिवरात्रि पर्व पर क्षेत्र के अलावा आसपास के जनपदों एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त थवईश्वर धाम पहुंचे। भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भोलेनाथ के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धूप, अगरबत्ती, नारियल, लड्डू और बताशे का प्रसाद अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां दूर-दूर से आते हैं।  बांदा-कानपुर मार्ग पर कीर्तिखेड़ा गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित इस धाम में एक विशाल मुख्य मंदिर के साथ कई छोटे मंदिर भी बने हुए हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग प्रतिदिन अपना रंग बदलता है और हर वर्ष चावल के दाने के बराबर बढ़ता है। मंदिर के मुख्य पुजारी दामोदर दास एवं गांव निवासी रामकृपाल मिश्र के अनुसार यह शिवलिंग लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ब्रिटिश काल में निचली गंगा नहर की खुदाई के दौरान प्राप्त हुआ था। तभी से यहां निरंतर पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और हवन-पूजन की परंपरा चली आ रही है। महाशिवरात्रि के अतिरिक्त सावन माह, बैसाख पूर्णिमा एवं कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों पर भी लाखों श्रद्धालु थवईश्वर धाम में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन अवसरों पर मंदिर परिसर में लगभग एक माह तक मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालु खरीदारी के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर समिति एवं जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए। सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश एवं यातायात नियंत्रण के व्यापक प्रबंध किए गए, जिससे श्रद्धालु शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर सकें।