तेरह रजब पर बहेरा सादात में हज़रत अली के जन्मदिन का मना भव्य जश्न



– हिंदू शायर शैलेन्द्र अजमेरी ने पढ़े मौला अली की शान में कसीदे

फतेहपुर। तेरह रजब के मुबारक मौके पर बहेरा सादात में हज़रत अली के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में पूरी रात भव्य महफिल का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि तेरह रजब वह ऐतिहासिक दिन है, जब हज़रत अली का जन्म मक्का स्थित काबा के अंदर हुआ था। इस अवसर पर शिया समुदाय द्वारा पूरी दुनिया में उत्साहपूर्वक जश्न मनाया जाता है।
बहेरा सादात स्थित नसीर हुसैन के बड़े इमामबाड़े में आयोजित इस रात्रीकालीन महफिल में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम में मौलाना जाबिर अब्बास एवं मौलाना हसन रज़ा (बनारस) ने हज़रत अली के जीवन, उनके आदर्शों और इस्लामी इतिहास में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
महफिल की विशेष बात यह रही कि हिंदू शायर शैलेन्द्र अजमेरी ने भी मौला अली की शान में भावपूर्ण कसीदे पढ़कर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश की। उनके साथ शायर दानिश लखनवी, नफीस हल्लौरी, क़क्कार सुल्तानपुरी, ज़फ़र नसीराबादी, ज़फ़र अड़हेरवी, सागर शिकारपुरी और अनवर सैथली ने भी अली की शान में कसीदे पेश किए। वक्ताओं ने बताया कि हज़रत अली न सिर्फ़ इस्लाम के महान व्यक्तित्व थे, बल्कि इंसानियत, इंसाफ़ और रहमदिली की जीती-जागती मिसाल भी थे। कहा गया कि उनकी हुकूमत में कोई भी इंसान भूखा नहीं सोता था। वे दिन में मेहनत-मज़दूरी करते और रात में अपनी पीठ पर राशन लादकर ग़रीबों तक पहुँचाते थे। उनकी शहादत का ज़िक्र करते हुए बताया गया कि 21 रमज़ान को कूफ़ा की मस्जिद में उन्हें शहीद किया गया। इसके बावजूद उन्होंने अपने क़ातिल के साथ भी इंसानियत और करुणा का व्यवहार किया, जो आज भी मानवता के लिए प्रेरणा है। कार्यक्रम में कर्बला की घटना का भी उल्लेख किया गया, जहाँ हज़रत अली के बेटे इमाम हसन और इमाम हुसैन ने अपने पूरे परिवार के साथ इस्लाम और इंसानियत की रक्षा के लिए कुर्बानी दी।
कार्यक्रम के अंत में बहेरा सादात की अंजुमन ज़ुल्फ़ेकार हैदरी द्वारा आए हुए अतिथियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। महफिल में शामिल लोगों ने एक-दूसरे को हज़रत अली के जन्मदिन की मुबारकबाद दी और अमन, भाईचारे व इंसानियत का पैग़ाम दिया। वहीं साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी ने सभी का आभार व्यक्त किया।