हापुड़: एनएमएमएस अटेंडेंस में फर्जीवाड़ा, रघुनाथपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा की पारदर्शिता पर सवाल

– हापुड़ ब्लॉक की रघुनाथपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के प्लांटेशन कार्य में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

– मस्टर रोल संख्या 551 की एनएमएमएस अटेंडेंस में लाइव फोटो की जगह पुरानी फोटो अपलोड

– 8 जनवरी 2026 की हाजिरी में सुबह 8:27 की फोटो रात 10:07 बजे की गई अपलोड

– डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम की विश्वसनीयता पर उठे बड़े सवाल

– ग्राम पंचायत सचिव, एडीओ पंचायत, बीडीओ से लेकर सीडीओ तक की निगरानी व्यवस्था कटघरे में

– केन्द्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा बन रही बंदरबांट और धन लूट का माध्यम

– सवाल कायम— क्या मनरेगा गरीबों के रोजगार की योजना है या अधिकारियों की नाक के नीचे चल रही लूट?

– अब सबकी निगाहें प्रशासन पर— दोषियों पर होगी कार्रवाई या फाइलों में ही दब जाएगा मामला?

हापुड़ जनपद के हापुड़ ब्लॉक अंतर्गत रघुनाथपुर ग्राम पंचायत में केन्द्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। मनरेगा के तहत चल रहे प्लांटेशन कार्य में एनएमएमएस ऐप के माध्यम से दर्ज की जाने वाली डिजिटल अटेंडेंस में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्टर रोल संख्या 551 में दर्ज उपस्थिति में लाइव फोटो लेने के बजाय पहले से खींची गई पुरानी फोटो अपलोड की गई। यह गड़बड़ी 8 जनवरी 2026 की हाजिरी में सामने आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस फोटो का समय सुबह 8 बजकर 27 मिनट बताया जा रहा है, उसे रात 10 बजकर 7 मिनट पर एनएमएमएस ऐप पर अपलोड किया गया, जो नियमों के पूरी तरह विपरीत है।
इस पूरे मामले में पंचायत सहायक जितेन्द्र की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। मनरेगा में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू किए गए डिजिटल सिस्टम के बावजूद इस तरह की गड़बड़ी से यह सवाल खड़ा हो गया है कि जमीनी स्तर पर निगरानी आखिर किस हद तक प्रभावी है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता के बावजूद ग्राम पंचायत सचिव, एडीओ पंचायत, बीडीओ, डीडीओ, डीसी मनरेगा, पीडी और सीडीओ जैसे जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से समय रहते कोई कार्रवाई या आपत्ति सामने नहीं आई। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि मनरेगा की निगरानी व्यवस्था कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है।
मामला उजागर होने के बाद भी अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं सवालों के घेरे में हैं। पीडी हापुड़ ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है, वहीं बीडीओ हापुड़ द्वारा जांच कराए जाने का आश्वासन दिया गया है। दूसरी ओर ग्राम पंचायत सचिव ने इसे “छोटी सी गलती” बताते हुए जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा जैसी राष्ट्रीय योजना का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह की अनियमितताओं से योजना की साख पर बट्टा लग रहा है। यदि एनएमएमएस जैसी डिजिटल व्यवस्था में भी फर्जी फोटो और समय में हेराफेरी संभव है, तो योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर ही यह तय होगा कि मनरेगा वास्तव में गरीबों के लिए रोजगार की गारंटी है या फिर कुछ लोगों के लिए लूट का जरिया बनती जा रही है।

बड़ा सवाल –

क्या रघुनाथपुर ग्राम पंचायत का यह मामला सिर्फ एक उदाहरण है?
क्या अन्य पंचायतों में भी इसी तरह से मनरेगा के नाम पर खेल हो रहा है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कभी कार्रवाई होगी या जांच केवल कागजों तक सिमट कर रह जाएगी?

अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं भी सवालों के घेरे में

मामले के सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के रुख ने संदेह और गहरा कर दिया है।

पीडी हापुड़ ने मामले को “दिखाने” तक सीमित रखा
बीडीओ हापुड़ ने जांच कराने की बात कही
वहीं ग्राम पंचायत सचिव ने इसे “छोटी सी गलती” बताकर पल्ला झाड़ लिया


सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि —

ग्राम पंचायत सचिव, एडीओ पंचायत, बीडीओ, डीडीओ, डीसी मनरेगा, पीडी एवं सीडीओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी क्या वास्तव में मनरेगा कार्यों की निगरानी कर रहे हैं? या फिर मनरेगा को पूरी तरह ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक और ग्राम रोजगार सेवकों के भरोसे छोड़ दिया गया है?